अगर आप 2017 में मुझसे मिलते और मेरे सामने Credit Card की बात करते, तो मैं literally तलवार निकाल लेता। मुझे लगता था Credit Card सबसे worst चीज़ है। पैसे उड़ते हैं, interest लगता है, debt बढ़ता है – बस बरबादी।
तो question ये है: Credit Card सच में बुरा है या हम उसे गलत तरीके से देख रहे हैं?
मैं clearly बोलना चाहता हूँ – जो लोग ऐसा बोलते हैं, उन्होंने Credit Cards को कभी responsibly use ही नहीं किया। अगर Credit Card को गलत तरीके से use करोगे, तो हाँ – वो poison है। लेकिन अगर सही तरीके से use करोगे, तो वो एक powerful financial tool है।
जब आप पहली बार Credit Card लेते हो, statement में एक चीज़ दिखती है: “Minimum Amount Due” ये सबसे बड़ा trap है।
Example:
- Total bill: ₹10,000
- Minimum amount due: ₹1,000–₹2,000
अगर आप सिर्फ minimum amount pay कर देते हो: Defaulter नहीं होता, लेकिन बाकी amount पर 36–40% annual interest लगता है, और उस interest पर 18% GST अलग से। मतलब double मार।
हमेशा Total Amount Due pay करो। कभी भी minimum amount के चक्कर में मत पड़ो।
First Credit Card कैसे Choose करें?
अगर आप एकदम beginner हैं, तो आपके पास कोई CIBIL score नहीं होगा। CIBIL score के बिना Credit Card मिलना बहुत मुश्किल है।
“CIBIL score नहीं है तो Credit Card नहीं मिलेगा। Credit Card नहीं है तो CIBIL score नहीं बनेगा।”
इसका एक easy solution है: FD-backed credit card लीजिए।
First Option, अगर आपका salary account है – मान लीजिए ICICI Bank, HDFC Bank, या किसी भी बैंक में – तो आप उस बैंक को बोलिए: “Sir, मेरी salary आपके बैंक में credit होती है। मुझे credit card apply करना है। मैं जिस credit card के लिए eligible हूँ, आप वही मुझे provide कर दीजिए।”
अगर Card की fees free है तो best है। Free card लीजिए। नहीं तो ₹200, ₹500, ₹1,000 जो भी fee है, दे दीजिए और अपनी CIBIL journey start कर दीजिए। आप 3 महीने उस कार्ड को रखेंगे, उस पर transactions करेंगे, payments timely देंगे। आपके पीछे एक CIBIL bureau team होती है।.

CIBIL क्या है?
एक bureau है – एक institution जो ये देखता है कि ये आदमी या ये औरत कितने trustworthy हैं। क्या ये time पर payment देते हैं या नहीं? तो जब आप 3–6 महीने तक Timely Payment करते रहेंगे, आपका CIBIL score बनना start हो जाएगा, जो एक बहुत अच्छी चीज़ है।
अब जब एक बार आपका CIBIL score बन गया, तब आप अपनी choice के cards की तरफ जा सकते हो – कौन सा card लेना है, कौन से spends के लिए।
अब फिर से coming back – CIBIL बनाने के दो तरीके होते हैं। या तो आप अपने existing salary account वाले bank के पास जाओ और बोलो कि जो सा card आप दे सकते हो, दे दो। अगर वो नहीं होता, तो दूसरा तरीका है FD-backed cards।
FD-backed cards क्या होते हैं?
आप bank में जा के बोलते हो: “Sir, ये लो ₹50,000 या ₹10,000 या ₹5,000 – जो भी amount हो – मेरी एक FD खोल दो।” FD खुल गई। अब आप बोलते हो: “Is FD के against मुझे एक credit card दे दो।”.
इससे FD-backed Card खा जाता है। उस card की limit क्या होगी?
जितनी FD डाली है, उतनी ही limit होगी। तो bank भी secure है। Bank बोलता है: मुझे CIBIL नहीं चाहिए। अपने पैसे दे दिए हैं। अगर आप due payments नहीं करोगे तो मैं FD से काट लूंगा।
तो या तो आप FD-backed card ले सकते हो। इसमें एक card है IDFC First Wow, जो एक FD-backed card है और मैं generally इसे recommend करता हूँ।
मैं इसलिए recommend करता हूँ क्योंकि इसके 1–2 extra benefits हैं:
- Lifetime free है
- इसमें forex charges नहीं लगते। मैं actually forex के लिए ये card use करता हूँ
- जब मैं बाहर जाता हूँ – 0% forex charges
FD-backed है, तो कोई भी ले सकता है। तो या तो आप FD-backed card लीजिए, या अपने bank account से कोई card link करवा लीजिए और journey start कर दीजिए। ये है एकदम beginner के लिए मेरी advice।
Credit Card लेना चाहिए या नहीं?
अगर life debit card + UPI से भी चल रही है, तब भी: YES, credit card लो। Reason: CIBIL बनेगा, Better loan rates future में, 1–2% reward भी better than 0%, बस एक condition: Overspend मत करो
Final Thought
Credit card ना hero है, ना villain। अगर discipline है – Reward machine, अगर discipline नहीं – Debt trap